परंपरा टूटी, भद्रवाह के शिव भक्तों ने चौगान में तोड़ी डल
बारिश के कहर से मणिमहेश यात्रा पर लगी रोक बनी वजह, हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ की आंखों से छलके आंसू , आस्था ने चौगान को बना दिया मणिमहेश
जम्मू-कश्मीर राज्य के डोडा जिला के भद्रवाह के श्रद्धालुओं ने शनिवार दोपहर बाद चंबा के ऐतिहासिक चौगान में डल तोडऩे की परंपरा का निर्वाहन किया। इस मौके पर चौगान में उमड़ी हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ की आंखों से आंसू छलक पड़े। उनको परंपरा के टूटने का दर्द था, लेकिन इस बार भगवान शिव के प्रति गूढ़ आस्था ने चौगान को ही मणिमहेश बना दिया। उल्लेखनीय है कि डोडा जिला के भद्रवाह से हजारों की तादाद में श्रद्धालु राधाष्टमी के शाही स्नान के मौके पर आस्था की डुबकी लगाने के लिए पहुंचे हुए थे। मगर बारिश के कारण बरपे कहर के चलते मणिमहेश यात्रा पर रोक लगने के बाद यह श्रद्धालु चंबा में डेरा डाले हुए थे।
शनिवार को राधाष्टमी के शाही स्नान के शुभ मुहूर्त के दौरान श्रद्धालुओं ने इस बार सदियों से चली आ रही डल तोडऩे की परंपरा पहली बार चौगान से ही निभाई। श्रद्धालुओं ने चौगान में रखी पवित्र छडिय़ों की परिक्रमा कर भगवान शिव से आशीर्वाद मांगा। बताते चलें कि सदियों पुरानी परंपरा के तहत राधाष्टमी पर मणिमहेश डल झील में छड़ी दल द्वारा डल तोडऩे की रस्म अदा की जाती थी, लेकिन इतिहास में पहली बार यह परंपरा चंबा चौगान में ही पूरी करनी पड़ी। श्रद्धालुओं और साधुओं ने चौगान में रखी छडिय़ों की परिक्रमा कर भगवान शिव से प्रार्थना करने के साथ ही पूजा-अर्चना कर परंपरा निभाई।