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इलाज नहीं, यहां तो डकैती है! जॉइनिंग के कुछ घंटों बाद ही लेडी डॉक्टर ने छोड़ी नौकरी, प्राइवेट अस्पताल के काले खेल का किया पर्दाफाश
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इलाज नहीं, यहां तो डकैती है! जॉइनिंग के कुछ घंटों बाद ही लेडी डॉक्टर ने छोड़ी नौकरी, प्राइवेट अस्पताल के काले खेल का किया पर्दाफाश

ब्यूरो रिपोर्ट | अपडेटेड: 14 Apr, 2026
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    इलाज नहीं, यहां तो डकैती है! जॉइनिंग के कुछ घंटों बाद ही लेडी डॉक्टर ने छोड़ी नौकरी, प्राइवेट अस्पताल के काले खेल का किया पर्दाफाश


    डीगढ़ : डॉक्टर को धरती पर भगवान का दर्जा दिया जाता है, लेकिन जब वही सफेद कोट 'कमीशन' और 'टारगेट' की भेंट चढ़ जाए, तो मानवता शर्मसार हो जाती है। चंडीगढ़ में एक जांबाज महिला डॉक्टर ने प्राइवेट अस्पतालों की इसी मनमानी और 'अस्पताल माफिया' के खिलाफ मोर्चा खोलकर पूरे देश में सनसनी फैला दी है।

    डॉ. प्रभलीन कौर ने एक नामी अस्पताल में बतौर फिजिशियन जॉइन किया, लेकिन वहां की काली हकीकत देखकर पहले ही दिन इस्तीफा थमा दिया।

    ICU को बना दिया कमाई का अड्डा: डॉक्टर का चौंकाने वाला खुलासा

    सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक भावुक और साहसी वीडियो में डॉ. प्रभलीन कौर ने बताया कि अस्पताल प्रबंधन उन पर अनैतिक दबाव बना रहा था। आरोप है कि अस्पताल की मालकिन (जो खुद एक गाइनोकॉलॉजिस्ट हैं) फिजिशियन पर इस बात का दबाव डालती थीं कि मरीज को जरूरत हो या न हो, उसे जबरन ICU में शिफ्ट किया जाए। मकसद साफ था मरीज के परिजनों की मजबूरी का फायदा उठाकर लाखों का बिल वसूलना।

    'मेरे कंधे पर बंदूक रखकर चलाना चाहते थे गोली'

    डॉ. प्रभलीन ने बेबाकी से कहा कि किसी मरीज को ICU की जरूरत है या नहीं, यह फैसला मेडिकल ग्राउंड्स पर फिजिशियन का होता है। लेकिन यहां अस्पताल को डॉक्टर नहीं, बल्कि एक रबर स्टैंप चाहिए था। उन्होंने कहा, "गलत काम मैनेजमेंट को करना था, लेकिन फाइल पर हस्ताक्षर मेरे होने थे। यानी बदनामी मेरी होती और मुनाफा उनका। मैंने तय कर लिया कि अपनी ईमानदारी को चंद रुपयों के लिए नहीं बेचूंगी। ऐसे ही लालची लोगों की वजह से पूरी डॉक्टर बिरादरी पर दाग लगता है।"

    नाम बताने से क्यों डरीं डॉक्टर? सिस्टम की कड़वी सच्चाई आई सामने

    जब सोशल मीडिया यूजर्स ने उनसे उस 'लुटेरे' अस्पताल का नाम सार्वजनिक करने को कहा, तो डॉ. प्रभलीन के जवाब ने देश के सिस्टम पर बड़े सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने भारी मन से कहा, "मैं उन लोगों जितनी रसूखदार या अमीर नहीं हूं। मेरे पास न तो राजनीतिक पहुंच है और न ही बड़ी पैरवी। हमारे देश की दुखद हकीकत यही है कि सच बोलने वाले को दबाने की कोशिश की जाती है।" हालांकि, उन्होंने साफ किया कि वह चुप नहीं बैठेंगी और सिस्टम की गंदगी के खिलाफ लड़ती रहेंगी।

    मानवाधिकार आयोग का समर्थन: 'फाइव स्टार होटल बन गए हैं अस्पताल'

    इस खुलासे के बाद मानवाधिकार आयोग के सदस्य और पद्मश्री जतिंदर सिंह शंटी डॉ. प्रभलीन के समर्थन में उतरे हैं। उन्होंने इस साहस की सराहना करते हुए कहा कि आज कई बड़े अस्पताल सेवा केंद्र के बजाय 'फाइव स्टार होटल' और 'कॉर्पोरेट ऑफिस' बन गए हैं। उद्योगपति डॉक्टरों को टारगेट देते हैं, जिससे चिकित्सा जैसा पवित्र पेशा अब सिर्फ लूट का जरिया बनकर रह गया है।

    डॉक्टर बिरादरी से अपील: नैतिकता से न करें समझौता

    जीरकपुर में अपना क्लिनिक चलाने वाली डॉ. प्रभलीन ने अपने साथी डॉक्टरों से भी मार्मिक अपील की है। उन्होंने कहा कि अक्सर युवा डॉक्टर करियर और मैनेजमेंट के दबाव में आकर गलत फैसलों पर हामी भर देते हैं, लेकिन यह पेशा विश्वास की नींव पर टिका है। फिलहाल, इस घटना ने स्वास्थ्य विभाग की नींद उड़ा दी है और लोगों के मन में प्राइवेट अस्पतालों के 'भारी-भरकम बिलों' को लेकर डर और गुस्सा दोनों है।




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