बड़ी खबरें
बी.एल. स्कूल कुनिहार के खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय ताइक्वांडो प्रतियोगिता में लहराया परचम, 17 में से 12 ने जीते पदक* 2 सितंबर 2026 Gold Price: सोने के दाम में तेज गिरावट, 24K, 22K और 18K गोल्ड के रेट जानें नेपाल में फिर मंडराया बाढ़ का खतरा, भोटेकोशी नदी का जलस्तर बढ़ने से अलर्ट बिजली बोर्ड पेंशनर्स ने 1 सितंबर के शिमला धरना-प्रदर्शन को दिया समर्थन बिजली बोर्ड पेंशनर्स ने 1 सितंबर के शिमला धरना-प्रदर्शन को दिया समर्थन बिजली बोर्ड पेंशनर्स ने 1 सितंबर के शिमला धरना-प्रदर्शन को दिया समर्थन सोने में बड़ी गिरावट के बाद अब क्या होगा? Goldman Sachs की भविष्यवाणी ने बाजार को चौंकाया Bank Holidays September 2026: सितंबर में 15 दिन बंद रहेंगे बैंक! SBI-HDFC जाने से पहले देखें पूरी लिस्ट पश्चिम बंगाल सरकार लौटाएगी मेसी के कोलकाता इवेंट का पैसा, मुख्यमंत्री का बड़ा ऐलान; 33 हजार लोगों को मिलेगा रिफंड पश्चिम बंगाल सरकार लौटाएगी मेसी के कोलकाता इवेंट का पैसा, मुख्यमंत्री का बड़ा ऐलान; 33 हजार लोगों को मिलेगा रिफंड बी.एल. स्कूल कुनिहार के खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय ताइक्वांडो प्रतियोगिता में लहराया परचम, 17 में से 12 ने जीते पदक* 2 सितंबर 2026 Gold Price: सोने के दाम में तेज गिरावट, 24K, 22K और 18K गोल्ड के रेट जानें नेपाल में फिर मंडराया बाढ़ का खतरा, भोटेकोशी नदी का जलस्तर बढ़ने से अलर्ट बिजली बोर्ड पेंशनर्स ने 1 सितंबर के शिमला धरना-प्रदर्शन को दिया समर्थन बिजली बोर्ड पेंशनर्स ने 1 सितंबर के शिमला धरना-प्रदर्शन को दिया समर्थन बिजली बोर्ड पेंशनर्स ने 1 सितंबर के शिमला धरना-प्रदर्शन को दिया समर्थन सोने में बड़ी गिरावट के बाद अब क्या होगा? Goldman Sachs की भविष्यवाणी ने बाजार को चौंकाया Bank Holidays September 2026: सितंबर में 15 दिन बंद रहेंगे बैंक! SBI-HDFC जाने से पहले देखें पूरी लिस्ट पश्चिम बंगाल सरकार लौटाएगी मेसी के कोलकाता इवेंट का पैसा, मुख्यमंत्री का बड़ा ऐलान; 33 हजार लोगों को मिलेगा रिफंड पश्चिम बंगाल सरकार लौटाएगी मेसी के कोलकाता इवेंट का पैसा, मुख्यमंत्री का बड़ा ऐलान; 33 हजार लोगों को मिलेगा रिफंड
यशवंत वर्मा पर जांच समिति की बड़ी कार्रवाई, तीनों आरोप साबित; अब महाभियोग का क्या होगा?
भारत

यशवंत वर्मा पर जांच समिति की बड़ी कार्रवाई, तीनों आरोप साबित; अब महाभियोग का क्या होगा?

ब्यूरो रिपोर्ट | अपडेटेड: 13 Aug, 2026
इस लेख में

    ये भी पढ़ें

    यशवंत वर्मा पर जांच समिति की बड़ी कार्रवाई, तीनों आरोप साबित; अब महाभियोग का क्या होगा? नई दिल्ली: पूर्व इलाहाबाद हाई कोर्ट जज जस्टिस यशवंत वर्मा के दिल्ली स्थ
    विज्ञापन Website development Agency

    यशवंत वर्मा पर जांच समिति की बड़ी कार्रवाई, तीनों आरोप साबित; अब महाभियोग का क्या होगा?


    नई दिल्ली: पूर्व इलाहाबाद हाई कोर्ट जज जस्टिस यशवंत वर्मा के दिल्ली स्थित आधिकारिक आवास से कथित तौर पर बड़ी मात्रा में नकदी मिलने के मामले में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा गठित जांच समिति ने बड़ा निष्कर्ष दिया है। समिति ने उनके खिलाफ लगाए गए तीनों आरोपों को साबित माना है।


    समिति की रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपों में आधिकारिक आवास से बरामद हुई कथित बेहिसाबी नकदी, मामले से जुड़े भौतिक साक्ष्यों में कथित छेड़छाड़ और पूरे घटनाक्रम को लेकर जस्टिस वर्मा की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण को लेकर सवाल शामिल थे। जांच समिति ने इन आरोपों को सिद्ध माना है।


    क्या था पूरा मामला?


    मार्च 2025 में दिल्ली स्थित जस्टिस यशवंत वर्मा के आधिकारिक आवास पर आग लगने की घटना के बाद वहां बड़ी मात्रा में जली और अधजली करेंसी मिलने की बात सामने आई थी। इस मामले ने न्यायपालिका में जवाबदेही को लेकर देशभर में बहस छेड़ दी थी।


    इसके बाद आरोपों की जांच के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 12 अगस्त 2025 को तीन सदस्यीय जजेज इंक्वायरी कमेटी गठित की थी। समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरविंद कुमार ने की थी। समिति ने अपनी रिपोर्ट मई 2026 में लोकसभा अध्यक्ष को सौंप दी थी।


    जस्टिस वर्मा ने क्या कहा था?


    जस्टिस वर्मा ने आरोपों से इनकार किया था। उन्होंने जांच के दौरान कहा था कि उन्हें नकदी की बरामदगी या उसके स्रोत से जोड़ने वाला प्रत्यक्ष सबूत नहीं है और वह घटना के समय दिल्ली में मौजूद नहीं थे।


    अप्रैल 2026 में उन्होंने इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज पद से इस्तीफा दे दिया था। उनके इस्तीफे के बाद यह सवाल उठने लगा था कि क्या संसद की ओर से शुरू की गई महाभियोग/हटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।


    अब क्या जस्टिस वर्मा का महाभियोग होगा?


    यही इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण सवाल है।


    जस्टिस वर्मा अब पद पर नहीं हैं, क्योंकि वह अप्रैल 2026 में इस्तीफा दे चुके हैं। इसलिए संसद द्वारा किसी मौजूदा जज को पद से हटाने वाली महाभियोग प्रक्रिया का व्यावहारिक असर अलग स्थिति में है। रिपोर्ट में आरोप साबित होने के बावजूद उन्हें अब पद से हटाने का सवाल पहले जैसा नहीं रह गया है।


    हालांकि, जांच रिपोर्ट का संसद में रखा जाना महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञों के अनुसार इसका महत्व केवल पद से हटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह न्यायिक जवाबदेही और भविष्य में ऐसे मामलों से निपटने के लिए भी अहम मिसाल बन सकता है।


    आगे क्या हो सकता है?


    समिति की रिपोर्ट में आरोप साबित होने के बाद अब मामले पर आगे की कार्रवाई को लेकर नजरें संसद और संबंधित संवैधानिक संस्थाओं पर हैं। रिपोर्ट में जस्टिस वर्मा के आचरण को लेकर गंभीर निष्कर्ष सामने आए हैं, लेकिन रिपोर्ट में आरोप साबित होना अपने आप में आपराधिक दोषसिद्धि नहीं है। किसी संभावित आपराधिक कार्रवाई के लिए अलग कानूनी प्रक्रिया आवश्यक होगी।


    जरूर पढ़ें

    इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के खिलाफ जवाबदेही की प्रक्रिया कितनी प्रभावी है और इस्तीफे के बाद ऐसे मामलों में संस्थागत कार्रवाई किस तरह आगे बढ़नी चाहिए।


    यशवंत वर्मा केस में फिलहाल सबसे बड़ा अपडेट यही है—जांच समिति ने तीनों आरोपों को साबित माना है, लेकिन उनके इस्तीफे के कारण अब पारंपरिक महाभियोग के जरिए पद से हटाने का सवाल व्यावहारिक रूप से अलग हो गया है।


    #YashwantVarma #OmBirla #JusticeYashwantVarma #Impeachment #LokSabha #Judiciary #CashAtHome #IndiaNews #BreakingNews #ViralNews

    विज्ञापन web development agency