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DAV कॉलेज केस में बड़ा एक्शन: यूटी उच्च शिक्षा निदेशक ने Punjab University से मांगी रिपोर्ट, अनियमितताओं पर घिरा मामला!
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DAV कॉलेज केस में बड़ा एक्शन: यूटी उच्च शिक्षा निदेशक ने Punjab University से मांगी रिपोर्ट, अनियमितताओं पर घिरा मामला!

ब्यूरो रिपोर्ट | अपडेटेड: 03 Apr, 2026
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    चंडीगढ़, 3 अप्रैल 2026:

    यूटी चंडीगढ़ के उच्च शिक्षा निदेशालय (DHE) ने के रजिस्ट्रार से डीएवी कॉलेज, चंडीगढ़ में सहायक प्रोफेसर सूरज नारायण की नियुक्ति और पदोन्नति से जुड़े मामले पर विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है। यह कदम विश्वविद्यालय की सीएएस कमेटी द्वारा उजागर की गई अनियमितताओं के बाद उठाया गया है।

    सूरज नारायण की नियुक्ति वर्ष 2017 में इतिहास विभाग में सहायक प्रोफेसर के रूप में हुई थी, जबकि उन्होंने 2024 में पदोन्नति के लिए आवेदन किया था।

    इस पूरे मामले को आरटीआई कार्यकर्ता ने उठाया। उन्होंने 1 फरवरी 2026 को चंडीगढ़ प्रशासन के मुख्य सचिव को शिकायत भेजकर अभ्यर्थी की पात्रता पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। उनका आरोप है कि यदि उम्मीदवार की योग्यता संदिग्ध थी, तो 2017 से लगातार 95% सरकारी ग्रांट-इन-एड कैसे जारी होती रही।

    डॉ. सिंगला के अनुसार, ग्रांट-इन-एड नीति के तहत यदि कोई कॉलेज यूजीसी और विश्वविद्यालय के नियमों का पालन नहीं करता, तो उच्च शिक्षा निदेशालय को अनुदान रोकने, घटाने या वापस लेने का अधिकार है। बावजूद इसके, इस मामले में अनियमितताओं के आरोपों के बीच भी अनुदान जारी रहना जवाबदेही पर सवाल खड़े करता है।

    उन्होंने यह भी कहा कि कथित रूप से अयोग्य अभ्यर्थी द्वारा छात्रों को पढ़ाना यूजीसी नियमों का गंभीर उल्लंघन है और इससे उच्च शिक्षा के मानकों पर असर पड़ सकता है।

    डॉ. सिंगला ने आरोप लगाया कि यह मामला कई महीनों से विश्वविद्यालय के कुलपति कार्यालय और डीसीडीसी कार्यालय में लंबित है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मामला सार्वजनिक धन से जुड़ा है, तो प्रशासन की चुप्पी क्यों बनी रही।

    अब उम्मीद जताई जा रही है कि उच्च शिक्षा निदेशालय के हस्तक्षेप के बाद को जल्द कार्रवाई करनी पड़ेगी, अन्यथा इस पूरे प्रकरण में देरी के लिए प्रशासन को जवाबदेह ठहराया जा सकता है।