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मुख्यमंत्री की झूठी घोषणाओं पर पुलिस पेंशनरों में भारी रोष, वर्चुअल मीटिंग में जताया विरोध
भारत

मुख्यमंत्री की झूठी घोषणाओं पर पुलिस पेंशनरों में भारी रोष, वर्चुअल मीटिंग में जताया विरोध

ब्यूरो रिपोर्ट | अपडेटेड: 04 May, 2026
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    *नेशन न्यूज़ | कुनिहार*  

    *रिपोर्ट: हरजिन्दर ठाकुर*  

    *दिनांक: 4 मई, 2026*


    मुख्यमंत्री की झूठी घोषणाओं पर पुलिस पेंशनरों में भारी रोष, वर्चुअल मीटिंग में जताया विरोध


    *कुनिहार/सोलन*: मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा पेंशनरों की देनदारियों और मेडिकल बिलों को लेकर बार-बार की जा रही घोषणाओं के पूरा न होने पर पुलिस पेंशनर वेलफेयर एसोसिएशन सोलन ने कड़ा रोष जताया है।


    आज रविवार को एसोसिएशन के संयोजक एवं वरिष्ठ मुख्य सलाहकार धनीराम तनवर की अध्यक्षता में हुई वर्चुअल मीटिंग में श्यामलाल ठाकुर, नेकीराम, श्याम लाल भाटिया, दीप राम ठाकुर, नागेंद्र ठाकुर, रतिराम शर्मा, निर्मल ठाकुर, जसवीर सिंह, सतपाल शर्मा, लेखराम काईथ, संत राम चंदेल, पतराम, चमन लाल, पुष्पा सुद, इंदर सिंह, जियालाल, जीतराम, वेद ठाकुर, जीत सिंह, प्रेम कंवर सहित दर्जनों पेंशनरों ने भाग लिया।

    मीटिंग में आरोप लगाया गया कि मुख्यमंत्री कई बार सार्वजनिक मंचों से घोषणा कर चुके हैं कि पेंशनरों की सभी देनदारियां और मेडिकल बिल एक महीने के भीतर अदा कर दिए जाएंगे। लेकिन हकीकत में अभी तक भुगतान नहीं हुआ। धनीराम तनवर ने कहा, "समझ नहीं आ रहा मुख्यमंत्री का महीना कितने दिनों का होता है। कई गंभीर बीमारी से पीड़ित पेंशनर इलाज के अभाव में भगवान को प्यारे हो गए।"

    *सरकार पर लगाए आरोप*:  

    पेंशनरों ने कहा कि पिछली सरकारों में ऐसा कभी नहीं हुआ। वर्तमान सरकार 12,000 करोड़ की देनदारियों का हवाला देकर अपना बचाव करती है, जबकि साढ़े चार साल से खुद मौज-मस्ती कर रही है। "सरकार कोई भी हो, विधायक-एमपी चार-चार लाख पेंशन ले रहे हैं। लेकिन जब पुलिस पेंशनरों की बारी आती है तो आर्थिक स्थिति खराब हो जाती है। यह शर्मनाक है।"

    एसोसिएशन ने याद दिलाया कि पुलिस कर्मी 24 घंटे प्रदेश की कानून-व्यवस्था और वीआईपी सुरक्षा में तैनात रहते हैं। "आज भी ये नेता पुलिस सुरक्षा के बगैर एक कदम नहीं चल सकते। नौकरी के दौरान सिविल कर्मचारी हड़ताल करते थे, तब भी पुलिस ड्यूटी पर रहती थी। लेकिन रिटायरमेंट के बाद उसी पुलिस को अपने हक के लिए सड़कों पर उतरना पड़ रहा है। यह प्रदेश के इतिहास में पहली बार हो रहा है।"

    संगठन ने मांग की है कि मुख्यमंत्री अपनी बार-बार की गई घोषणाओं को तुरंत पूरा करें। "पेंशनरों को गुमराह करना बंद करें, वरना अगला सख्त कदम उठाने को मजबूर होंगे।"

    पुलिस पेंशनरों का कहना है कि पहले के मुख्यमंत्री ऐसी झूठी घोषणाएं नहीं करते थे और न ही पेंशनरों को सड़कों पर आना पड़ा। "यह इतिहास में दर्ज हो गया कि ऐसी सरकार भी आई जिसने पुलिस पेंशनरों को हक के लिए आंदोलन को मजबूर किया।"

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