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TMC Vs TMC: चुनाव आयोग का बड़ा फैसला, दोनों गुटों के लिए फ्रीज हुआ पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न
भारत

TMC Vs TMC: चुनाव आयोग का बड़ा फैसला, दोनों गुटों के लिए फ्रीज हुआ पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न

ब्यूरो रिपोर्ट | अपडेटेड: 17 Sep, 2026
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    TMC Vs TMC: चुनाव आयोग का बड़ा फैसला, दोनों गुटों के लिए फ्रीज हुआ पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न

    नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहे संगठनात्मक विवाद के बीच चुनाव आयोग ने बड़ा अंतरिम आदेश जारी किया है। आयोग ने आगामी विधानसभा उपचुनावों के दौरान तृणमूल कांग्रेस (AITC/TMC) के नाम और उसके आरक्षित ‘Flowers and Grass’ यानी जोड़ा फूल-घास चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों के लिए रोक लगा दी है।

    आयोग के मुताबिक फिलहाल उसके सामने पार्टी के संगठनात्मक नियंत्रण को लेकर दो प्रतिद्वंद्वी दावे हैं। एक गुट ममता बनर्जी के नेतृत्व में है, जबकि दूसरे गुट का नेतृत्व अरूप रॉय कर रहे हैं। दोनों पक्ष खुद को असली तृणमूल कांग्रेस बताते हुए पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर दावा कर रहे हैं।

    उपचुनाव से पहले क्यों बढ़ा विवाद?

    यह विवाद पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव से पहले और महत्वपूर्ण हो गया है। दोनों गुटों ने इन चुनावों के लिए उम्मीदवार उतारे और पार्टी के आधिकारिक नाम व चुनाव चिह्न पर अपना दावा किया।

    चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलें और उपलब्ध दस्तावेजों पर विचार करने के बाद कहा कि पार्टी के वास्तविक संगठनात्मक नियंत्रण पर विस्तृत फैसला आवश्यक है। यह प्रक्रिया Election Symbols (Reservation and Allotment) Order, 1968 के पैरा 15 के तहत आगे बढ़ेगी।

    दोनों गुटों को अब क्या करना होगा?

    अंतरिम व्यवस्था के तहत चुनाव आयोग ने दोनों गुटों को निर्देश दिया है कि वे उपचुनाव के लिए नए नाम और अलग चुनाव चिह्न चुनें। दोनों पक्षों को अपने पसंदीदा तीन-तीन नाम और तीन-तीन फ्री सिंबल प्राथमिकता क्रम में देने को कहा गया है। यह विकल्प 18 सितंबर 2026 को सुबह 11 बजे तक जमा करने हैं।

    आयोग के निर्देश के अनुसार, दोनों गुट चाहें तो अपने नए नाम में मूल All India Trinamool Congress से जुड़ाव दिखा सकते हैं। हालांकि, उपचुनाव के लिए दोनों को अलग-अलग चुनाव चिह्न आवंटित किए जाएंगे।

    संगठन पर भी आमने-सामने दावे

    पार्टी के संगठनात्मक नियंत्रण को लेकर दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है। विद्रोही गुट की ओर से जून में पार्टी की नई राष्ट्रीय कार्यसमिति के गठन का दावा किया गया था। इस गुट ने तर्क दिया कि पिछली राष्ट्रीय कार्यसमिति का कार्यकाल समाप्त हो चुका है। दूसरी ओर, ममता बनर्जी गुट ने इस दावे को चुनौती देते हुए कहा कि प्रतिद्वंद्वी पक्ष पार्टी संविधान और उसके बाद हुए संशोधनों की सही व्याख्या नहीं कर रहा है।

    ममता बनर्जी गुट ने यह भी तर्क दिया कि जून में हुई बैठक पार्टी की निर्धारित बहु-स्तरीय संगठनात्मक प्रक्रिया के अनुरूप नहीं थी। वहीं दूसरे गुट का कहना है कि उसकी बैठक पार्टी संविधान के अनुरूप आयोजित की गई थी।

    अब आगे क्या होगा?

    चुनाव आयोग का मौजूदा आदेश अंतरिम व्यवस्था है और अंतिम फैसला आने तक लागू रहेगा। आयोग को आगे यह तय करना होगा कि पार्टी के संगठनात्मक नियंत्रण और नाम-चिह्न पर किस पक्ष का दावा स्वीकार किया जाता है। तब तक दोनों गुटों को पश्चिम बंगाल उपचुनाव में नए नाम और अलग चुनाव चिह्न के साथ चुनाव लड़ने की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

    इस फैसले के बाद पश्चिम बंगाल के आगामी उपचुनावों में दोनों गुटों की चुनावी पहचान को लेकर स्थिति पूरी तरह बदल गई है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि दोनों पक्ष कौन से नए नाम और चुनाव चिह्न चुनते हैं और चुनाव आयोग आगे पार्टी के मूल नाम व आरक्षित चिह्न पर अंतिम फैसला कब करता है।

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