नया मैप जारी, भारत का 61 फीसदी हिस्सा भूकंप के हाई रिस्क में, कभी भी डोल सकती है धरती
पूरा हिमालयन क्षेत्र सबसे खतरनाक जोन-6 में शामिल
भारत ने कई दशकों बाद अपना सबसे बड़ा भूकंप खतरा नक्शा बदल दिया है। नए मानचित्र में पूरा हिमालय क्षेत्र अब सबसे ऊंचे खतरे वाले जोन छह में शामिल कर दिया गया है। पहले यह इलाका जोन चार और पांच में बंटा हुआ था। इस बदलाव के बाद देश का लगभग 61 फीसदी हिस्सा मध्यम से अत्यधिक भूकंप जोखिम वाले क्षेत्रों में आता है। बता दें कि भारत एक ऐसा देश है, जहां भूकंप का खतरा हर कोने में छिपा है। ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (बीआईएस) ने देश के भूकंप जोन मैप को बदल दिया है।
यह नया मैप बीआईएस 1893 (2025) नामक भूकंप प्रतिरोधी डिजाइन कोड का हिस्सा है। पुराने मैप में भूकंपों के पुराने एपिसेंटर को देखते हुए जोन बनाए गए थे, लेकिन अब यह मैप ज्यादा वैज्ञानिक तरीके से तैयार किया गया है। इसमें पूरे हिमालयी क्षेत्र को पहली बार सबसे खतरनाक जोन छह में डाल दिया गया है। इस बदलाव से देश के 61 फीसदी हिस्से को अब मध्यम से उच्च खतरे वाले जोन में रखा गया है। पहले यह आंकड़ा 59 फीसदी था। आसान भाषा में समझें तो सबसे ज्यादा खतरे में ये क्षेत्र हैं, उत्तराखंड, हिमाचल, जम्मू-कश्मीर, सिक्किम, अरुणाचल, उत्तर-पूर्व के सारे पहाड़ी राज्य। दिल्ली एनसीआर, गुजरात का कच्छ क्षेत्र, बिहार-नेपाल बॉर्डर। तुलनात्मक रूप से दक्षिण भारत का एक छोटा हिस्सा ही कम खतरे में माना जाए
