हिमाचल की 52 दवाएं गुणवत्ता जांच में फेल, दो दवाएं नकली, CDSCO के ड्रग अलर्ट रिपोर्ट ने खोले गंभीर राज
औषधि मानक नियंत्रण संगठन की जांच में हिमाचल के दवा उद्योगों में निर्मित 52 दवाएं गुणवता के पैमाने पर फिसड्डी साबित हुई है। जिन दवाओं के सैंपल फेल हुए है, उनमें बच्चों की जिंक सिरप से लेकर ब्लड प्रेशर, हृदय, संक्रमण, कैंसर, गैस्ट्रिक और दर्द निवारक जैसी आम और गंभीर बीमारियों में दी जाने वाली दवाएं शामिल हैं। इन दवाओं का निर्माण बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़, सोलन कालाअंब, पांवटा साहिब, ऊना व संसारपुर में हुआ हैं। इसके अलावा हिमाचल में निर्मित दो दवाए नकली भी निकली हैं। राज्य दवा नियंत्रक प्रधिकरण ने संबंधित दवा उद्योगों को कारण बताओ नोटिस जारी कर कार्रवाई शुरू कर दी है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन द्वारा जारी सितंबर माह के ड्रग अलर्ट में राज्य में बनी 52 दवाएं गुणवत्ता जांच में सबस्टैंडर्ड पाई गई हैं। यह देशभर की असफल घोषित 112 दवाओं का लगभग 46 प्रतिशत है।
केंद्रीय औषधि प्रयोगशालाओं ने 52 दवा नमूनों को एनएसक्यू घोषित किया है, जबकि राज्य औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं ने 60 नमूनों को मानक से निम्न गुणवत्ता वाला पाया। इन सभी नमूनों की जांच देशभर की प्रयोगशालाओं में की गई थी, जिनमें सीडीएल कोलकाता, सीडीटीएल मुंबई, आरडीटीएल चंडीगढ़ और गुवाहाटी की केंद्रीय लैबों के साथ बद्दी, रायपुर, गोवा, पंजाब, तेलंगाना और जम्मू-कश्मीर की राज्य की लैब शामिल थीं। वहीं दो दवाएं नकली, चार मिसब्रांडेड और 46 एनएसक्यू श्रेणी की हैं।
