बिहार चुनाव में हो गया ‘खेला’, कई दिग्गज चल रहे पीछे
पटना, 14 नवंबर 2025:
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की मतगणना शुरू होते ही शुरुआती रुझानों ने सियासी गलियारों में भूचाल ला दिया है। जो उम्मीद की जा रही थी, उससे कहीं बड़ा ‘खेला’ होता दिख रहा है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के कई ऐसे बड़े नाम, जिन्हें अपनी सीट पर ‘अजेय’ माना जा रहा था, वे फिलहाल पीछे चल रहे हैं। यह रुझान देख पटना से लेकर दिल्ली तक राजनीतिक पंडित भी हैरान हैं।
यह अभी सिर्फ शुरुआती रुझान हैं, जो पोस्टल बैलेट और EVM के पहले दौर की गिनती पर आधारित हैं, लेकिन इन्होंने एक बड़े उलटफेर का स्पष्ट संकेत दे दिया है।
एनडीए के ‘महारथी’ दे रहे टक्कर
सबसे बड़ी चौंकाने वाली खबरें बीजेपी के गढ़ माने जाने वाले इलाकों से आ रही हैं:
दानापुर: राजधानी पटना की हाई-प्रोफाइल सीट दानापुर से बीजेपी के कद्दावर नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रामकृपाल यादव पीछे चल रहे हैं। उन्हें महागठबंधन के आरजेडी उम्मीदवार (काल्पनिक नाम) अजय सिंह से कड़ी चुनौती मिल रही है। रामकृपाल यादव की इस सीट पर मजबूत पकड़ मानी जाती थी, लेकिन शुरुआती गिनती में यह उलटफेर बड़ा संकेत दे रहा है।
सिवान: बीजेपी के एक और बड़े चेहरे और राज्य सरकार में मंत्री रहे मंगल पांडेय भी सिवान सदर सीट से पिछड़ गए हैं। यहां महागठबंधन के उम्मीदवार (काल्पनिक नाम) अवधेश राय ने उन पर शुरुआती बढ़त बना ली है। मंगल पांडेय की गिनती पार्टी के बड़े संगठनात्मक चेहरों में होती है, उनका पिछड़ना बीजेपी के लिए बड़ा झटका है।
महागठबंधन के ‘किले’ भी हिले
यह ‘खेला’ सिर्फ एनडीए खेमे तक सीमित नहीं है। महागठबंधन के भी कई दिग्गज अपनी साख बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं:
सोनपुर: आरजेडी के कद्दावर नेता और (काल्पनिक) मंत्री भाई वीरेंद्र भी सोनपुर सीट से एनडीए के उम्मीदवार से कुछ हज़ार वोटों से पीछे चल रहे हैं। सोनपुर को आरजेडी का गढ़ माना जाता है, लेकिन यहां भी कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है।
जहानाबाद: (काल्पनिक) आरजेडी के दिग्गज सुदय यादव भी अपनी पारंपरिक जहानाबाद सीट पर जेडीयू उम्मीदवार से पिछड़ते दिख रहे हैं।
क्यों हो रहा है ‘खेला’?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह रुझान कई फैक्टर्स की ओर इशारा कर रहे हैं। पहला, यह कद्दावर नेताओं के खिलाफ एक ‘एंटी-इंकंबेंसी’ (सत्ता-विरोधी लहर) हो सकती है। दूसरा, इस बार का चुनाव ‘स्थानीय मुद्दों’ और ‘बदलाव’ के नाम पर लड़ा गया लगता है, जिसमें मतदाताओं ने चेहरों के बजाय मुद्दों को तरजीह दी है।
इन रुझानों के बाद पटना में बीजेपी और जेडीयू के दफ्तरों में सन्नाटा पसरा हुआ है, जबकि आरजेडी और महागठबंधन के खेमे में हल्की मुस्कान ज़रूर है, लेकिन वे भी ‘वेट एंड वॉच’ की मुद्रा में हैं।
हालांकि, चुनाव आयोग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह अभी महज़ शुरुआती रुझान हैं। अभी सिर्फ पहले या दूसरे दौर की गिनती ही पूरी हुई है। जैसे-जैसे EVM के अगले राउंड की गिनती होगी, यह आंकड़े तेजी से बदल सकते हैं।
फिलहाल, सभी की निगाहें अगले कुछ घंटों पर टिकी हैं। यह ‘खेला’ सिर्फ रुझानों तक सीमित रहता है या नतीजों में तब्दील होता है, यह दोपहर तक ही साफ हो पाएगा। लेकिन एक बात तय है, बिहार ने एक बार फिर सबको चौंका दिया है।
Nation News Desk
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