राजनीति से संन्यास लेंगे प्रशांत किशोर? नई शर्तें रखकर बोले- “बयान पर आज भी कायम हूँ”
पटना: बिहार के राजनीतिक गलियारों में बड़े बदलाव का वादा लेकर उतरे ‘जन सुराज’ के संस्थापक प्रशांत किशोर को अपने पहले ही चुनावी प्रयास में हार का सामना करना पड़ा है। चुनाव परिणामों के बाद, सबकी निगाहें इस बात पर टिकी थीं कि क्या पीके अपने उस पुराने और बहुचर्चित बयान पर अमल करेंगे, जिसमें उन्होंने सफल न होने पर राजनीति छोड़ने की बात कही थी?
हार के बाद आज पहली बार मीडिया के सामने आए प्रशांत किशोर ने न केवल हार की जिम्मेदारी ली, बल्कि ‘राजनीति से संन्यास’ लेने वाले अपने बयान पर एक बड़ा स्पष्टीकरण भी दिया।
“हार की 100% जिम्मेदारी मेरी है”
प्रशांत किशोर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत में ही स्पष्ट कर दिया कि वह इस चुनावी हार के लिए किसी और को दोष नहीं देंगे। उन्होंने कहा, “जनता का जो भी जनादेश है, हम उसे सिर झुकाकर स्वीकार करते हैं। हम लोगों तक अपनी बात पहुंचाने में असफल रहे और इसकी 100% जिम्मेदारी मैं लेता हूँ। यह न तो कार्यकर्ताओं की हार है और न ही हमारे मुद्दों की।”
‘संन्यास’ पर दिया बड़ा स्पष्टीकरण
जब पत्रकारों ने उनसे उनके पुराने ‘संन्यास’ वाले बयान की याद दिलाई, तो पीके ने कहा कि वह आज भी अपने उस बयान पर पूरी तरह कायम हैं, लेकिन उनकी बात को सही संदर्भ में समझने की जरूरत है।
प्रशांत किशोर ने कहा, “मैं अपने बयान पर कायम हूँ। मैंने कहा था कि अगर मैं बिहार में व्यवस्था परिवर्तन के अपने प्रयास में सफल नहीं हुआ, तो मैं यह काम छोड़ दूँगा। लेकिन मेरे बयान का मतलब यह कभी नहीं था कि मैं बिहार छोड़कर भाग जाऊँगा।”
“संन्यास लूंगा, पर बिहार नहीं छोडूंगा”
पीके ने अपनी बात को स्पष्ट करते हुए ‘नई शर्तें’ या यूँ कहें कि अपने बयान की नई व्याख्या पेश की।
“मेरा संन्यास पारंपरिक, जातिवादी और भ्रष्ट राजनीति से होगा, जिससे लड़ते हुए शायद हम इस बार विफल हुए। लेकिन मेरा ‘संन्यास’ बिहार के लोगों से नहीं होगा। मैं बिहार में ही रहूँगा, बिहार के लोगों के बीच रहूँगा और उनके हक की आवाज पहले से भी ज्यादा मजबूती से उठाता रहूँगा।”
उन्होंने आगे कहा, “जन सुराज का अभियान सिर्फ एक चुनाव लड़ने के लिए नहीं बना था। यह व्यवस्था बदलने का एक लंबा संघर्ष है। चुनाव एक पड़ाव था, मंजिल नहीं। हम हार गए, हम सीखेंगे और फिर से लड़ेंगे।”
आगे क्या है ‘जन सुराज’ का भविष्य?
प्रशांत किशोर ने स्पष्ट किया कि ‘जन सुराज’ का संगठन भंग नहीं होगा। उन्होंने कहा कि चुनावी हार के बाद अब हम संगठन की समीक्षा करेंगे और अपनी कमियों को दूर करेंगे। उन्होंने कहा, “भले ही हम चुनाव हार गए, लेकिन हमने लाखों लोगों तक अपनी बात पहुंचाई है। हमारी लड़ाई बिहार के भविष्य के लिए है और वह जारी रहेगी।”
साफ है कि प्रशांत किशोर ने चुनावी हार तो स्वीकार कर ली है, लेकिन उन्होंने अपने ‘संन्यास’ वाले बयान को चतुराई से एक नई दिशा दे दी है। वह राजनीति के मैदान से हट नहीं रहे, बल्कि उनका कहना है कि वह अब एक अलग रणनीति के साथ बिहार के मुद्दों पर संघर्ष करते रहेंगे।
Nation News Desk
Remember, each pitch sent is an opportunity to present your brand or business to a new audience, as well as build new relationships within the media. So if you have any Pitch around you write us at : editor@nationnews.in
