🌼 अमृत कलश 🌼“हँसी ही सच्ची पूजा है”
🪯 श्रीकृष्ण कहते हैं—
सौ बार मंदिर जाना,
हजार दीप जलाना,
या करोड़ों को भोजन कराना भी
तब व्यर्थ हो जाता है,
जब आपकी वजह से
किसी की आँख से
आँसू की एक बूँद भी गिर जाए।
🪯 कहते हैं—
रोओ तो अकेले रोओ,
हँसो तो शायद
कुछ लोग साथ दे दें।
पर रोना क्यों?
रोना तो परमात्मा का अपमान है।
क्योंकि अस्तित्व
रोना जानता ही नहीं—
अस्तित्व तो
नृत्य जानता है,
उत्सव जानता है।
हँसिए…
तो फूल भी मुस्कुराएँगे,
चाँद और तारे भी
आपके संग हँसेंगे।
रोने वाला अकेला रह जाता है,
पर हँसने वाले के साथ
सारा अस्तित्व
हँसने लगता है,
नाचने लगता है। 🌸
