🔥कैसा था वो क्षण जब देवी सती के रौद्र रूप से कांप उठे स्वयं महादेव? | एक अद्भुत पुराण कथा🔥
देवी सती, दक्ष प्रजापति की पुत्री और भगवान शिव की प्रथम पत्नी—उनकी कथा हम सब जानते हैं, लेकिन देवी पुराण में वर्णित इस प्रसंग का रहस्य और भी गहरा है।
दक्ष प्रजापति ने भव्य यज्ञ तो किया, पर आमंत्रित करना भूल गए अपनी ही पुत्री सती और दामाद भगवान शिव को। यज्ञ का समाचार सुनते ही सती बिना निमंत्रण पिता के घर जाने को आतुर हो उठीं। महादेव ने समझाया—
“बिना बुलाए जाना और मृत्यु—दोनों एक समान हैं।”
परंतु सती अडिग रहीं—“मैं अवश्य जाऊंगी।”
महादेव ने खिन्न होकर कहा कि यदि वह उनकी बात नहीं मानतीं, तो अपनी इच्छा से जाएं। यह सुनकर सती अपमान और क्रोध से जल उठीं—और उस क्रोध में धारण किया अपना रौद्र रूप।
फड़कते अधर, कालाग्नि जैसे नेत्र, भयानक दाढ़ें—सती का यह रूप देखकर खुद महादेव भी भयभीत हो उठे।
शिव जिस दिशा भागते, वहां सती के ही दस भयंकर स्वरूप दिखाई देते—
काली, तारा, लोकेशी, कमला, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, षोडशी, त्रिपुरसुंदरी, बगलामुखी, धूमावती और मातंगी।
अंत में जब महादेव ने आंखें खोलीं, वे देवी काली के रूप में सती को अपनी आंखों के सामने पाए। सती बोलीं—
“ये सभी रूप मेरे ही हैं।”
शिव ने हाथ जोड़कर क्षमा मांगी और सती का क्रोध शांत हुआ। फिर सती ने प्रण लिया—
“यदि मेरे पिता दक्ष के यज्ञ में आपका अपमान हुआ है, तो वह यज्ञ पूर्ण नहीं होने दूंगी।”
और वे दृढ़ संकल्प के साथ यज्ञ की ओर चली गईं…
✨यह कथा सिर्फ मिथक नहीं, यह स्त्री शक्ति और स्वाभिमान का अपरिमित रूप है।
