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युद्ध के साए में बीबीएन में कच्चे माल का संकट, उद्योगों ने जताई चिंता, होम अप्लायंस उद्योग पर बढ़ा दबाव
प्लास्टिक दाने में 80 से 90 रुपए प्रति किलो तक उछाल
एल्यूमीनियम की कमी और आयात में देरी से परेशानी
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और उससे प्रभावित वैश्विक सप्लाई चेन का असर अब हिमाचल प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्र बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ (बीबीएन) के होम अप्लायंस उद्योग पर भी दिखाई देने लगा है। कच्चे माल की उपलब्धता में आई अनिश्चितता, एल्यूमीनियम की कमी, प्लास्टिक रॉ मटीरियल के दामों में अचानक उछाल और आयात में हो रही देरी ने उद्योगों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। उद्योग जगत का कहना है कि यदि हालात जल्द सामान्य नहीं हुए, तो आने वाले समय में उत्पादन प्रभावित होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। बताया जा रहा है कि कई प्रकार के प्लास्टिक रॉ मटीरियल के दामों में 80 से 90 रुपए प्रति किलोग्राम तक का इजाफा हुआ है। विदेश से आने वाले पॉलिमर की आवक लगभग न के बराबर रह गई है, जिसके चलते उद्योगों के पास घरेलू बाजार से ही कच्चा माल खरीदने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। इसी स्थिति का लाभ उठाते हुए कई सप्लायरों ने कीमतों में अचानक बढ़ोतरी कर दी है, जिससे उद्योगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। बताते चलें कि हिमाचल प्रदेश में 50 से अधिक उद्योग ऐसे हैं, जो सीधे तौर पर घरेलू उपकरणों के निर्माण से जुड़े हैं। एक प्रमुख होम अप्लायंस उद्योग के जीएम ने बताया कि प्रदेश में इस क्षेत्र से जुड़े कई उद्योग पहले से ही आर्थिक मंदी के दौर से गुजर रहे हैं।
सामान्य तौर पर इसी समय से होम अप्लायंस उत्पादों का सीजन रफ्तार पकड़ता है, लेकिन इस बार कच्चे माल के दामों में अचानक आए उछाल और सप्लाई में आई किल्लत ने उद्योगों की परेशानी बढ़ा दी है। कई कंपनियों के पास सीमित मात्रा में ही कच्चा माल बचा है और यदि आयात में देरी जारी रही तो उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है। इस बीच पॉलिमर उत्पादों की सप्लाई से जुड़ी कंपनी ने भी अपने ग्राहकों को एक नोटिस जारी कर संकेत दिया है कि पेट्रोकेमिकल कच्चे माल की वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित होने से आने वाले समय में कीमतों और उपलब्धता पर असर पडऩे की संभावना है। उद्योग जगत का कहना है कि कच्चे माल के संकट के साथ-साथ कॉमर्शियल एलपीजी की कमी ने भी कई इकाइयों की चिंता बढ़ा दी है। यदि गैस की आपूर्ति प्रभावित होती है, तो इसका असर उत्पादन लागत और संचालन दोनों पर पड़ सकता है। उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि पहले से ही बाजार में मांग कमजोर है और कई इकाइयां आर्थिक दबाव झेल रही हैं। ऐसे में कच्चे माल की कीमतों में उछाल, आयात में अनिश्चितता और गैस आपूर्ति से जुड़ी समस्याओं ने होम अप्लायंस उद्योग के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। यदि हालात जल्द सामान्य नहीं हुए, तो इसका असर न केवल उत्पादन पर बल्कि स्थानीय रोजगार और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।